जब हैवानियत के सौदागरों ने यूँ एक एक करके दफ़्न किया ज़िंदगी को हाँ बहुत कुछ जला था उस रोज कहीं कोई ... जब हैवानियत के सौदागरों ने यूँ एक एक करके दफ़्न किया ज़िंदगी को हाँ बहुत कुछ जला...
आज तो मेरे साथ मेरी कलम भी असमन्जस है. आज तो मेरे साथ मेरी कलम भी असमन्जस है.
खुशी तभी असली है जब उसे साजा किया जाए। खुशी तभी असली है जब उसे साजा किया जाए।
अनीष बोला- अच्छा पापा चलता हूँ।और वो चला गया। नीलेश अपनी बेटी के साथ खेलने लगा। अनीष बोला- अच्छा पापा चलता हूँ।और वो चला गया। नीलेश अपनी बेटी के साथ खेलने लग...
यह छुट्टिया हमेशा के लिए नहीं हो सकती? फिर तो कितना मजा आ जाता ! यह छुट्टिया हमेशा के लिए नहीं हो सकती? फिर तो कितना मजा आ जाता !
चलिये हम सब इन लोगो के ढेर सारी दुआयें यह तो हम लोग कर ही सकते हैं। चलिये हम सब इन लोगो के ढेर सारी दुआयें यह तो हम लोग कर ही सकते हैं।